मनुष्य का हदय ही होता है सच्चा देवालय-संत रमताराम महाराज

 


कुरज के श्रीरामद्वारा परिसर में भक्तमाल कथा में प्रवचन देते हुए संत व उपस्थित श्रद्वालुगण।



मनुष्य का हदय ही होता है सच्चा देवालय-संत रमताराम महाराज

                                             कुरज में भक्तमाल कथा का आयोजन

कुंवारिया। संत रमताराम रामस्नेही ने कहा कि व्यक्ति का हदय ही सच्चा देवालय होता है। हदय की पवित्रता को जीवन में अपना ले तो व्यक्ति कल्याण के मार्ग पर स्वत ही आगे बढता चला जाएगा।

उन्होने समीपवर्ती कुरज के श्रीरामद्वारा पसिर में चातुर्मास के पावन अवसर पर निरंतर चल रहे भक्तमाल कथा में सदगुरू कबीर साहेब के जीवन दर्शन पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री कबीर दास जी ने इस धरा धाम पर राम नाम की अलख जगाई एवं नाना प्रकार के मत, पंथ, संप्रदाय, मजहब आदि में फैले पाखंडवाद का खंडन किया। पक्षपात रहित होकर सभी को एक जैसा ज्ञान प्रदान करते हुए सार्वभौम परमात्मा की सत्ता को प्रतिपादित किया।

संत रमताराम ने कहा कि कबीर दास जी ने सदेव मानवता की सेवा को श्रेष्ठ धर्म बताया है। कबीरदासजी ने कहा कि हदय में विराजमान है वही परमात्मा है। हदय की बात को पुरे मनोयोग से सुने व आचरण मे अपनाए तो स्वय के साथ ही समाज का कल्याण होगा। भगवान के द्वारा बनाया मंदिर यह मनुष्य शरीर है यही सच्चा देवालय है जिसमें वह मालिक परमात्मा स्वयं विराजमान हैं। उन्होने कहा कि महापुरुषों की बातों को जीवन में धारण करके अपने जीवन को सदमार्ग पर लगाते हुए भगवान के नाम का सुमिरन करते रहना चाहिए।

 इस अवसर पर पुष्कर लाल लाहोटी, जगदीश चंद्र काबरा, गिरिराज लाहोटी, कैलाश गिरी गोस्वामी, रामेश्वर लाल जागेटिया, माधवलाल जाट, ओम प्रकाश राजोरा, बसंती लाल लाहोटी, मोहनलाल खटीक, श्याम लाल सोनी, बसंती लाल खटीक, बाबूलाल खटीक, कालुराम रेगर सहित कई पुरुष एवं महिलाएं मौजूद थे।

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