"तुम चंदन बन जाना".........
रचनाकारों ने बांधा समां "तुम चंदन बन जाना"......... राजसमंद में साकेत साहित्य संस्थान की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न रचनाकारों ने बांधा समां राजसमंद । सूचना केन्द्र, राजसमंद में साकेत साहित्य संस्थान की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष वीणा वैष्णव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार मनोहर लाल श्रीमाली एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में राजेन्द्र प्रसाद सनाढ्य "राजन" थे । कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। गोष्ठी में जिले के ख्यातनाम कवियों एवं कवयित्रियों ने विविध विषयों पर अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्थान के उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने "कमेंट लाइक बिना भी, कवि कर्म निभाना, सर्व हित हेतु, कलम अपनी सदा चलाना" , पुष्पा पालीवाल ने "नारी होकर नहीं सहूंगी...", डॉ. सम्पत रेगर ने "म्हारी पहचान म्हारी मेवाड़ी..." , चंद्रशेखर नारलाई ने "बंदरबाट.. जेबकाट, पिताजी की वसीयत..." , राजेन्द्र प्रसाद सनाढ्य ने "मूं वोइस बच्चो हूँ......