सरपंची के बेताज बादशाह थे "बापू"
सेमा के पूर्व सरपंच स्व.गौरीशंकर श्रीमाली के नाम अनोखा रिकॉर्ड
सरपंची के बेताज बादशाह थे "बापू"
सेमा के पूर्व सरपंच स्व. गौरीशंकर श्रीमाली के नाम अनोखा रिकॉर्ड
श्रीमाली ने कई साल तक सेमा गांव में की सरपंचाई
राजसमंद। आम जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए जनता के बीच 'बापू' नाम से जाने-पहचाने गए सेमा के स्व. गौरीशंकर श्रीमाली (त्रिवेदी) का सरपंची का रिकॉर्ड जिले में शायद ही कभी टूट पाए।
स्व. गौरीशंकर श्रीमाली "बापू" वर्ष 1959 में ग्राम पंचायत के अस्तित्व में आने के बाद लगातार 55 वर्षों तक उन्हें कोई शिकस्त नहीं दे पाया। राज्य में पंचायत राज व्यवस्था लागू होने से पूर्व सन् 1952 से 1959 तक के प्रारंभिक काल में वे तहसील पंचायत के सदस्य के तौर पर जन सेवा करते रहे। इसके बाद सरपंच की कुर्सी पर सवार हुए तो आरक्षण प्रावधान लागू होने के बाद उन्होंने स्वयं ही सीट छोड़ी, लेकिन उप सरपंच के पद पर बने रहे। वे एकाधिक बार निर्विरोध और शेष बार भारी मतों से विजयी होते रहे। पहली बार 30 अक्टूबर 1959 को 'बापू' के सिर पर सरपंची का सेहरा बंधा जो 41 साल बाद 2 फरवरी 2000 तक बरकरार रहा। इसके बार आरक्षण लागू होने के कारण उन्होंने सरपंची की दावेदारी नहीं की, लेकिन अंतिम श्वास तक उप सरपंच के पद पर आसीन रहे। पंचायत राज लागू होने के बाद 1 सितम्बर 1977 से दिसम्बर 1981 एवं 1 जुलाई 1991 से 30 जनवरी 1995 तक राज्यभर में निर्वाचन प्रक्रिया स्थगित रहने व प्रशासक काल लागू होने के कारण सेमा ग्राम पंचायत भी अन्य पंचायतों की तरह जन प्रतिनिधित्व विहीन रही। बापू युवावस्था में स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे। निरंतर कीर्तिमान कायम करते हुए 9 जनवरी 2002 को 88 साल की आयु में उनका देहावसान हुआ, लेकिन कीर्तिमान भविष्य में भी कोई तोड़ सकेगा यह कहना मुश्किल ही है।


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