जो बांटा जाता है वो प्रसाद और बटोरा जाता है वो होता है विषाद - साध्वी सुहृदय गिरि

शुक्रवार को होगा श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति

जो बांटा जाता है वो प्रसाद और बटोरा जाता है वो होता है विषाद - साध्वी सुहृदय गिरि

षष्ठम दिवस किया नवधा भक्ति, जटायु और सबरी प्रसंग का वर्णन

शुक्रवार को होगा श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति

राजसमंद। जो बांटा जाता है वो प्रसाद होता है जो बटोरा जाता है वो विषाद होता है। श्रीराम कथा के षष्ठम दिवस पर साध्वी सुहृदय गिरि ने कहा कि बांटने और बटोरने में बड़ा अंतर होता है इसलिए हमें बांटने की कला संतों से सीखनी चाहिए। संत अपने लिए नहीं, अपनो के लिए जीने वाले होते हैं। बिच्छू अपना स्वभाव नहीं छोड़ सकता है तो संत कैसे अपना स्वभाव छोड़ सकता है।

सूक्ष्म अभिमान भी हो जाता है तो बड़े से बड़ा ज्ञानी भी अपनी कीर्ति को नष्ट कर देता है। कपटी मनुष्य को तो भगवान भी पसंद नहीं करता, भगवान का आशीर्वाद उसी को मिलता है जो सहज और सरल होता है।

स्त्री प्रकृति का रूप है उसे श्रृंगारित तो होना चाहिए लेकिन अपनी मर्यादा और संस्कार नहीं छोड़ने चाहिए। मर्यादा और संस्कार के बिना स्त्री के प्रति सम्मान पैदा नहीं होगा। जहां सम्मान होता है वहां अनेक समस्याओं का समाधान तो अपने आप ही हो जाता है।

विद्या और अविद्या की तुलना करते हुए साध्वी सुहृदय ने माता सीता को विद्या और सुपर्णखा को अविद्या की संज्ञा देते हुए नवधा भक्ति की व्याख्या की।

कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन चंदन सिंह आसोलिया, पुष्पा आसोलिया, तारा वैष्णव, मोहन दास वैष्णव, गिरीश अग्रवाल और राजकुमारी अग्रवाल ने किया।

वहीं कथा के दौरान मीठालाल शर्मा, संपत लाल लड्ढा, नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष आशा पालीवाल, मंजू मुद्गल, अनुराधा लड्ढा, पुष्पा साहू, राधा गौड़, माहेश्वरी महिला मंडल अध्यक्ष कृष्णा लड्ढा, कैलाश वैष्णव, सुशील बड़ाला सहित सैकड़ों लोगों ने ज्ञान यज्ञ का रस पान किया।

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