बालिका शिक्षा के हित में कुंवारिया में अलग विद्यालय की आवश्यकता - विधायक माहेश्वरी

बालिका शिक्षा के हित में कुंवारिया में अलग विद्यालय की आवश्यकता - विधायक माहेश्वरी

राजसमंद। विधायक राजसमंद दीप्ति माहेश्वरी ने विधानसभा सदन में पर्ची के माध्यम से विशेष उल्लेख प्रस्ताव द्वारा राजसमंद विधानसभा क्षेत्र के कुंवारिया कस्बे में बालिका शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को उठाते हुए वहां पुनः पृथक राजकीय बालिका विद्यालय की व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने बताया कि कुंवारिया कस्बे में पिछले लगभग 50 वर्षों से राजकीय बालिका विद्यालय संचालित होता रहा है, जिसके माध्यम से कुंवारिया सहित आसपास के लगभग 15 ग्रामों की बालिकाओं को सुगमता से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता रहा। यह विद्यालय ग्रामीण परिवेश में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है तथा स्थानीय अभिभावकों के बीच इस विद्यालय के प्रति विश्वास भी बना रहा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन राज्य सरकार के कार्यकाल में उक्त विद्यालय को महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में परिवर्तित करते हुए सह-शिक्षा विद्यालय बना दिया गया। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में पृथक बालिका विद्यालय समाप्त हो गया, जिससे बालिकाओं के लिए उपयुक्त शैक्षणिक वातावरण का अभाव उत्पन्न हुआ।

विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने कहा कि ग्रामीण सामाजिक परिस्थितियों के कारण अनेक अभिभावक अपनी बालिकाओं को सह-शिक्षा विद्यालयों में भेजने के प्रति संकोच व्यक्त करते हैं। इसी कारण विद्यालय के सह-शिक्षा में परिवर्तित होने के बाद बालिकाओं की उपस्थिति में उल्लेखनीय कमी आई है। पूर्व में जहां लगभग 450 बालिकाएं अध्ययनरत थीं, वहीं वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 150 के आसपास रह गई है।

उन्होंने सदन के माध्यम से माननीय शिक्षा मंत्री का ध्यान इस विषय की ओर आकृष्ट करते हुए राज्य सरकार से आग्रह किया कि कुंवारिया में वर्तमान में संचालित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय को सह-शिक्षा व्यवस्था से पृथक करते हुए पुनः बालिका विद्यालय के रूप में संचालित करने अथवा क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए नया बालिका विद्यालय स्थापित करने के संबंध में आवश्यक निर्णय लिया जाए, जिससे बालिकाओं की शिक्षा निरंतरता के साथ आगे बढ़ सके।

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