अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" की कलम से '' गुरु पूर्णिमा ''

अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली" की कलम से '' गुरु पूर्णिमा ''


                     '' गुरु पूर्णिमा ''
पूर्णिमा का चाँद गगन में आज अमृत बरसाए,  
गुरु कृपा की शीतलता से अंतर्मन महकाए।  
तम को चीर कर ज्ञान का जो दीप प्रज्वलित करें,  
ऐसे वंदनीय गुरु को हम आज कोटिश नमन करे।

गुरु न शब्दों का बंधन, न अक्षरों की डोर,  
गुरु तो मौन में बहती निर्मल ज्ञान की छोर।  
भटके हुए पथिक को मंज़िल का पता बताते,  
गिरते को थाम कर फिर से हौसला बढ़ाते।

फटकार में छिपा था जब भविष्य का वरदान,  
आशीष से मिला था सफलता का भान।  
त्रुटि पर टोका, सफलता पर गले लगाया,  
इसी अनुशासन ने तो मुझे इंसान बनाया।

ऋण चुका पाना संभव नहीं उपकारों का,  
पर प्रण ये है कि चलूँ दिखाए हुए द्वारों का।  
आपके दिए संस्कार ही मेरी पहचान बनें,  
आपके कदम चिह्न ही मेरे राह का निशान बने।

आज चाँदनी साक्षी है इस श्रद्धा के गान की,  
हे गुरुदेव स्वीकारिए अर्पण इस सम्मान की।  

*गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः*  
*गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः* 🙏

अन्नू राठौड़ "रुद्रांजली"
कांकरोली, राजसमंद

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मातृकुंडिया बांध जलभराव की समस्या का होगा स्थाई समाधान- विधायक माहेश्वरी

फियावड़ी के देव मगरी पर दस दिवसीय मंगरी श्याम भैरवनाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 11 फरवरी से होगा शुरू

जुणदा-खेडी गांव में ही उचित मूल्य की दुकान खुलने पर ग्रामीणों ने जताई खुशी